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Monday, 2 July 2018

Bhagat Singh Biography and Facts about in Hindi and English || हिंदी में भगत सिंह के बारे में तथ्य ||www.allnationalknowledge.in

July 02, 2018

शहीद भगत सिंह की जीवनी और उनके  बारे में ग़ज़ब रोचक तथ्य 

 Facts about Bhagat Singh in Hindi 

Bhagat facts and biography

Bhagat Singh – भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों की सूचि में भगत सिंह का नाम सबसे पहले लिया जाता है। इस नाम को पूरा वर्ल्ड जानता है। इनकी जब कभी भी हम उन शहीदों के बारे में सोचते है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिये अपने प्राणों की आहुति दी तब हम बड़े गर्व से भगत सिंह का नाम ले सकते है। 

वह राजनीतिक अवज्ञा के कई हिंसा प्रदर्शन में शामिल थे और उन्हें कई बार गिर गया किया गया था। सिंह को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी की हत्या का दोषी पाया गया और 23 मार्च, 1931 को फांसी दी गई।

23 साल की आयु में उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ फाँसी दे दी गयी थी। और मरते वक्त भी उन्होंने फाँसी के फंदे को चूमकर मौत का ख़ुशी से स्वागत किया था। तभी से भगत सिंह देश के युवाओ के प्रेरणास्त्रोत बने हुए है।


Bhagat Singh - Bhagat Singh's name is first mentioned in the list of the most influential revolutionaries of the Indian independence movement. This name knows the whole world. Whenever we think of those martyrs who sacrificed their lives for the country's independence, then we can take the name of Bhagat Singh with great pride. 

He was involved in many violence demonstrations of political defiance and he had been dropped several times. Singh was found guilty of killing British police officer and hanged on March 23, 1931

At the age of 23 he was hanged with Rajguru and Sukhdev. And at the time of his death, he kissed the hangman's trumpet and welcomed death with happiness. Since then, Bhagat Singh has remained the inspiration for youth of the country.

Bhagat Singh biography 


Bhagat Singh (Sandhu Jat) was born in 1907 to Kishan Singh and Vidyavati in No. 105, GB, Banga Village, Jarnwala Tehsil, Lyallpur District, Punjab.

Bhagat Singh (संधू जाट) का जन्म 1907 में किशन सिंह और विद्यावती को चाल नंबर 105, जीबी, बंगा ग्राम, जरंवाला तहसील, ल्याल्लापुर जिला, पंजाब में हुआ... 

He was born at the time when his father and his two uncle were released from jail. His family members were learned, some of which were actively involved in the Indian independence movement, and the rest of the Maharaja used to serve the army of Ranjit Singh.

उनका जन्म उसी समय हुआ था जब उनके पिता और उनके दो चाचा को जेल से रिहा किया गया था। उनके परिवार के सदस्य सीख थे, जिनमे से कुछ भारतीय स्वतंत्रता अभियान में सक्रीय रूप से शामिल थे, और बाकी महाराजा रणजीत सिंह की सेना की सेवा किया करते थे।

The village of Bhagat Singh's ancestor was a Khatkar Kalan, which was only a few distances from Nawashahar, Punjab (now its name changed to Shahid Bhagat Singh Nagar).

भगत सिंह के पूर्वजो का ग्राम खटकर कलां था, जो नवाशहर, पंजाब (अभी इसका नाम बदलकर शहीद भगत सिंह नगर रखा गया है) से कुछ ही दुरी पर था।

His family was politically active. His grandfather Arjun Singh was a follower of Dayanand Saraswati in the campaign for the reconstruction of Hindu Arya Samaj. It had a great effect on Bhagat Singh.

उनका परिवार राजनितिक रूप से सक्रीय था। उनके दादा अर्जुन सिंह, हिंदु आर्य समाज की पुनर्निर्मिति के अभियान में दयानंद सरस्वती के अनुयायी थे। इसका भगत सिंह पर बहोत प्रभाव पड़ा।

Bhagat Singh's father and Chacha Kartar Singh and every Dayal Singh were also members of the Ghadar Party being run by them. Arjit Singh was exiled to various legal litigation due to Sue Singh's death in 1910 after being released from prison in Lahore.

भगत सिंह के पिता और चाचा करतार सिंह और हर दयाल सिंह द्वारा चलाई जा रही ग़दर पार्टी के भी सदस्य थे। अरजित सिंह पर बहोत सारे क़ानूनी मुक़दमे होने के कारण उन्हें निर्वासित किया गया जबकि स्वरण सिंह की 1910 में लाहौर में ही जेल से रिहा होने बाद मृत्यु हो गयी।

In 1919, when he was only 12, thousands of unarmed people were killed in Bhagat Singh jalliyanwala  Bagh. When he was 14, he was one of those people who used to kill the British to defend themselves or to protect the country.

1919 में, जब वे केवल 12 साल के थे, भगत सिंह जलियांवाला बाग़ में हजारो निःशस्त्र लोगो को मारा गया। जब वे 14 साल के थे वे उन लोगो में से थे जो अपनी रक्षा के लिए या देश की रक्षा के लिए ब्रिटिशो को मारते थे।

In 1923, Bhagat Singh joined the National College of Lahore, where he participated in other activities as soon as he took part in the dramatic society (Dhongi Samaj).

In 1923, Punjabi essay organized by the Punjabi Hindi Sahitya Sammelan won essay competition, in which he wrote about the problems of Punjab. He was very inspired by Italy's Giuseppe Mazzini campaign, and in view of this, Bhagat Singh founded the Indian National Youth Association in March 1926 in the Naujawan Bharat Sabha.

Later Bhagat Singh joined the Hindustan Republic Association, which had many brave leaders like Chandrashekhar Azad, Ram Prasad Bismil and Shahid Ashfullah Khan.

1923 में, भगत सिंह लाहौर के नेशनल कॉलेज में शामिल हुए, जहा उन्होंने दूसरी गतिविधियों में भी सहभाग लिया जैसे ही नाटकीय समाज (ढोंगी समाज) में सहभाग लेना।

1923 में, पंजाब Hindi साहित्य सम्मलेन द्वारा आयोजित निबंध स्पर्धा जीती, जिसमे उन्होंने पंजाब की समस्याओ के बारे में लिखा था। वे इटली के Giuseppe Mazzini अभियान से बहुत  प्रेरित हुए थे और इसी को देखते हुए भगत सिंह ने मार्च 1926 में नौजवान भारत सभा में भारतीय राष्ट्रिय युवा संस्था की स्थापना की। 

बाद में भगत सिंह हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन में शामिल हुए, जिसमे कई बहादुर नेता थे जैसे चंद्रशेखर आज़ाद, राम प्रसाद बिस्मिल और शहीद अश्फल्लाह खान।

Given the influence of Bhagat Singh on the youth, the police took Bhagat Singh into custody in May 1927, saying that he was involved in the Lahore bomb blast in October 1926. Five weeks after being arrested and released, he was released on bail.

युवाओं पर भगत सिंह के इस प्रभाव को देखते हुए पुलिस ने मई 1927 में भगत सिंह को अपनी हिरासत में लिया ये कहकर की वे अक्टूबर 1926 में हुए लाहौर बम धमाके में शामिल थे। और हिरासत में लेने के पाच हफ्तों बाद उन्हें जमानत पर रिहा किया गया।


Bhagat Singh was also writing for Urdu and Punjabi newspapers selling in Amritsar and his editor was also. And these newspapers were published in the New India Bharat Sabha in which the British had drawn the skins.

भगत सिंह अमृतसर में बिकने वाले उर्दू और पंजाबी अखबारों के लिए लिखते भी थे और उसके संपादक भी थे। और इन्ही अखबारों को नौजवान भारत सभा में प्रकाशित किया जाता 

Kirti also used to write Kisan Party newspaper for Kirti, as well as Veer Arjun, published in Delhi, also wrote for the newspaper. Most of his articles used the name Balwant, Ranjit and Rebel.

वे कीर्ति किसान पार्टी के अखबार कीर्ति के लिए भी लिखते थे साथ ही दिल्ली में प्रकाशित होने वाले वीर अर्जुन अखबार के लिए भी लिखते थे। अपने लेख में ज्यादातर बलवंत, रणजीत और विद्रोही नाम का उपयोग करते थे।

Bhagat Singh wanted to take revenge of Lala Lajpat Rai's death . Bhagat Singh killed 17th December 1927  British police officer John Saunders. The police made many unsuccessful attempts to capture Bhagat Singh and he always failed to catch Bhagat Singh. After some time, Bhagat Singh along with Batukeshwar Dutt throws two bombs and a letter on the Principal Law House.

Where they both got caught according to their plans. Where he was sent to jail on charges of murder, and when Bhagat Singh announced 116 days fast for the sake of equal rights to the European prisoners, he got the help of the entire nation far away.

भगत सिंह लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेना चाहते थे  भगत सिंह ने  17th December 1927   ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सौन्देर्स की हत्या की। पुलिस ने भगत सिंह को पकड़ने के लिए कई असफल प्रयत्न किये और हमेशा वह भगत सिंह को पकड़ने में नाकाम रही। और कुछ समय बाद ही भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर प्रधान विधि सदन पर दो बम और एक पत्र फेका।

जहा वे दोनों अपनी योजना के अनुसार पकडे गये। जहा एक हत्या के आरोप में उन्हें जेल में भेजा गया, और जब भगत सिंह ने यूरोपियन कैदियों को समान हक्क दिलाने के लिए 116 दिन के उपवास की घोषणा की तब दूर दूर से उन्हें पुरे राष्ट्र की सहायता मिली।

The British officers submitted enough evidence against him and keeping his appeal in the High Court of England, Bhagat Singh was sentenced to 23 years of short life sentence.

ब्रिटिश अधिकारियों ने उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत जमा किए और इंग्लैंड के उच्च न्यायालय में अपनी अपील की, भगत सिंह को 23 साल की अल्पकालिक सजा सुनाई गई।


भगत सिंह के इस बलिदान ने भारतीय युवाओं को राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उठाकर लड़ने के लिए प्रेरित किया । और आज भी कई युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

भगत सिंह में बचपन से ही देशसेवा की प्रेरणा थी। उन्होंने हमेशा ब्रिटिश राज का विरोध किया। और जो उम्र उनकी खेल-कूदने की थी उस उम्र में एक क्रांतिकारी आन्दोलन किया था। भगत सिंह की बहादुरी के कई किस्से हमें इतिहास में मिल मिलेंगे।

This sacrifice of Bhagat Singh inspired Indian youth to fight for freedom of the nation. And even today many young people consider them to be their ideal.

From childhood, Bhagat Singh was the inspiration for nation service. He always opposed the British Raj. And the age at which they had to play was a revolutionary movement at that age. We will find many stories of Bhagat Singh's bravery in history.

भगत सिंह के इस बलिदान ने भारतीय युवाओं को राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उठाकर लड़ने के लिए प्रेरित किया । और आज भी कई युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

भगत सिंह में बचपन से ही देशसेवा की प्रेरणा थी। उन्होंने हमेशा ब्रिटिश राज का विरोध किया। और जो उम्र उनकी खेल-कूदने की थी उस उम्र में एक क्रांतिकारी आन्दोलन किया था। भगत सिंह की बहादुरी के कई किस्से हमें इतिहास में मिल मिलेंगे।



  •  बचपन में जब भगत सिंह अपने पिता के साथ खते में जाते थे तो वहे आपने पिता से पूछते थे की हम जमीन में बंदूक क्यों नहीं उग सकते।
  • Bhagat Singh had established "National youth organization" in his college days.
  • भगत सिंह ने आपने कॉलेज के दिनों में " National youth Organisation" की स्थापना की थी। 
  • Bhagat Singh gave the slogan of Inqlab Zindabad
  • इंकलाब जिंदाबाद का नारा भगत सिंह ने ही दिया था। 
  • Bhagat Singh's shoes, watch, pen and his shirt are still safe
  • भगत सिंह के जूते ,घडी , पेन और उनकी शर्ट आज भी सुरक्षित है 
  • Judge G.C. Hilton who was sentenced to hang Bhagat Singh
  • भगत सिंह को फांसी की सजा सुनने वाला न्यायाधीश (जज) जी.सी हिल्टन थे। 
  • After the birth of Bhagat Singh, her grandmother named her name 'Bhago Wala'. Which means 'good fortune' He later became known as 'Bhagat Singh'.
  • भगतसिंह के जन्म के बाद उनकी दादी ने उनका नाम 'भागो वाला' रखा था। जिसका मतलब होता है 'अच्छे भाग्य वाला'। बाद में उन्हें 'भगतसिंह' कहा जाने लगा।
  • Bhagat Singh did not agree with Mahatma Gandhi's policies of non-violence. Bhagat Singh felt that freedom can not be obtained without arms.
  • महात्मा गांधी की अहिंसा की नीतियों से भगत सिंह सहमत नहीं थे. भगत सिंह को लगता था कि बिना हथियार उठाए आजादी नहीं मिल सकती है।
  • When he passed the Intermediate examination in 1923, then his parents were planning to marry him. So they left the house and fled and said that now freedom will be my bride.
  • जब उन्होंने 1923 में इंटरमिजिएट परीक्षा उत्तीर्ण की तो उसके बाद उनके माता – पिता ने उनकी शादी की योजना बना रहे थे। तो वे घर छोड़कर भाग गये और उन्होंने कहा अब तो आजादी ही मेरी दुल्हन बनेगी।
  • Written by Bhagat Singh, Pandit Chandrashekhar Azad, his party got involved with the "Hindustan Republican Association", in which 4 revolutionaries were sentenced to death, including Ram Prasad Bismil in Kakori Kand.
  • काकोरी काण्ड में राम प्रसाद बिस्मिल सहित 4 क्रांतिकारियों को फाँसी की सजा हुई इससे क्रोधित होकर भगत सिंह, पण्डित चंद्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी “हिन्दुस्थान रिपब्लिकन एसोसिएशन” से जुड़ गये।
  • Bhagat Singh together with Rajguru, on 17 December 1927, the British officer, J. P. Sanders was killed.
  • भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1927  को अँग्रेज अधिकारी जे. पी. सांडर्स को मारा था।
  • Bhagat Singh had teamed up with Sukhdev to kill the Superintendent of Police James Scott in Lahore but had killed John Saunders (Assistant Superintendent) due to the misidentification.
  • भगत सिंह ने सुखदेव के साथ मिलकर लाहौर में पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कोट को मारने की रणनीति बनाई थी पर गलत पहचान के कारण जॉन सॉन्डर्स (सहायक अधीक्षक) को मार दिया था।
  • On April 8, 1929, Bhagat Singh, along with his colleagues, threw bombs at the Parliament House of the Central Assembly of the British Government.
  • 8 अप्रैल 1929 में भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार की सेण्ट्रल एसेम्बली के संसद भवन पर बम फेंके थे।
  • Seeing the growing riots of Hindu Muslims, Bhagat Singh declared himself an atheist.
  • हिन्दू मुस्लिमों के बढ़ते दंगो को देखकर भगत सिंह ने खुद को नास्तिक घोषित कर दिया था।
  • Bhagat Singh used to receive Bengali, besides Hindi, Urdu, Punjabi and English.
  • भगत सिंह को हिंदी, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी। 
  • Before going to the gallows, he was reading Lenin's biography.
  • फाँसी पर जाने से पहले वे लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे।
  • His last wish was that he should be shot, but the British government made his point of view.
  • उनकी आखरी इच्छा थी की उन्हें गोली मार दी जाए पर ब्रिटिश सरकार ने उनकी इस बात को नजर अंदाज कर दिया।
  • Bhagat Singh was to be hanged on March 24, 1931 but due to the fear of revolt, the British hanged him on March 23, 1931. It is a coincidence that the hanging day was also 23 and at that time Bhagat Singh was also 23 years old.
  • भगत सिंह को 24 मार्च 1931 को फाँसी दी जानी थी मगर विद्रोह के डर के कारण अंग्रेज़ो ने उनको 23 मार्च 1931 को फाँसी दे दी। संयोग की बात है फाँसी वाला दिन भी 23 था और उस समय भगत सिंह की आयु भी 23 वर्ष थी।
  • While going to the gallows, the three Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev were singing with fun.
  • फाँसी पर जाते समय वे तीनों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव मस्ती से गा रहे थे।

          “मेरा रंग दे बसंती चोला, मेरा रंग दे;
          मेरा रंग दे बसंती चोला। माय रंग दे बसंती चोला।”


          Thursday, 28 June 2018

          Adolf Hitler biography in Hindi || Adolf Hitler kon tha ||allnationalknowledge.in

          June 28, 2018

          Adolf Hitler biography in Hindi अडोल्फ़ हिटलर जीवन परिचय 

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          Hitler 

          हिटलर की तुलना में अधिक महत्वाकांक्षी लोग शायद ही कभी इस धरती पर पैदा हुए होंगे। एडोल्फ़ हिटलर एक ऐसा नाम है जिसका नाम से केवल जर्मनी ही नहीं बल्कि सारा विश्व एक समय काँपता था। जिसकी तानाशाही के बारे में आज भी लोग बाते करते है। यहूदियों पर उसके द्वारा किये गए अत्याचार से एक बार ऐसा लगा जैसे की ये दुनिया में से उनका नामो निशान मिटा देगा। 

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          अडोल्फ़ हिटलर जीवन परिचय – Adolf Hitler biography in Hindi

          पूरा नाम  – अडोल्फ़ हिटलर        Full name - Adolf Hitler
          जन्म – 20 अप्रैल, 1889          Birth - April 20, 1889
          जन्मस्थान – ऑस्ट्रिया           Birthplace - Austria
          माता – क्लारा हिटलर            Mother - Clara Hitler
           विवाह –  इव्हा के साथ        Marriage - with Eva


          Adolf Hitler was a German politician and leader of the Nazi Party and Chancellor of Germany from 1933 to 1945. From 1934 to 1945, Germany became the leader of the Nazi Party. While being the dictator of the Nazi Party of Germany, he started World War II in Europe, in which he attacked Poland in 1939, and also as Adolf Hitler of Devastation in World War II was the main person. Hitler was born in Austria, later he became a part of Austria-Hungary and grew up in Linz.

          • अडोल्फ़ हिटलर एक जर्मन राजनेता और नाज़ी पार्टी के नेता थे और 1933 से 1945 तक जर्मनी के चांसलर थे। 1934 से 1945 तक जर्मनी की नाज़ी पार्टी के नेता बने हुए थे। 
          • जर्मनी की नाज़ी पार्टी के तानाशाह रहते हुए उन्होंने यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुवात की थी, जिसमे उन्होंने 1939 में पोलैंड पर हमला किया था और साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध में होने वाले तबाही के अडोल्फ़ हिटलर ही मुख्य व्यक्ति थे। 
          • हिटलर का जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ था, बाद में वे ऑस्ट्रिया-हंगरी का हिस्सा बने और लिंज़ में बड़े हुए।
          Hitler came to Germany in 1913 and was included in the German army during World War  first. In 1919, he joined the NSDAP German Workers Party and in 1921 he became the main leader of NSDAP.

          • 1913 में हिटलर जर्मनी आए और प्रथम विश्व युद्ध के समय में जर्मनी आर्मी में उन्हें शामिल किया गया था। 
          • 1919 में वे NSDAP जर्मन वर्कर्स पार्टी में दाखिल हुए और 1921 में वे NSDAP के मुख्य नेता बने।
          In 1923, he made a change in order to regain control of the water. But Hitler's plan of change was unsuccessful and he had to go to jail because of this, at the same time he started his dictatorship by writing his autobiography and also told the people about the struggle made in his political career.

          • 1923 में उन्होंने पानी पर कब्ज़ा पाने के लिये आकस्मिक ही शासन में परिवर्तन किये। 
          • लेकिन हिटलर की परिवर्तन की योजना असफल रही और इस वजह से उन्हें कारावास (जेल) भी जाना पड़ा था, इसी समय उन्होंने अपनी तानाशाही की शुरुवात अपनी आत्मकथा लिखकर की और साथ ही उन्होंने अपने राजनितिक जीवन में किये गए संघर्ष के बारे में भी लोगो को बताया।
          After being released from prison in 1924, he got very much help and after getting help, he started promoting elements such as pan-Germanism and non-communism.
          Due to being a part of the Jewish conspiracy, Hitler often wanted to end international capitalism and communism.


          • 1924 में जेल से रिहा होने के बाद, उन्हें बहुत मदद मिली और सहायता मिलने के बाद, उन्होंने पैन-जर्मनवाद और गैर-साम्यवाद जैसे तत्वों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया।
          • यहूदी साजिश का हिस्सा होने के कारण, हिटलर अक्सर अंतरराष्ट्रीय पूंजीवाद और साम्यवाद को समाप्त करना चाहता था।
          Since 1933, Hitler was the largest party of the German states of Nazi Party,
          In which Hitler was appointed on 30 January 1933 as Chancellor.
          All subsequent elections were won by Hitler's organization, after which the Enabling Act was passed in the German states, which led to the process of converting the Weimar Republic into Nazi Germany.

          • 1933 से, हिटलर नाज़ी पार्टी के जर्मन राज्यों की सबसे बड़ी पार्टी थी, जिसमें 30 जनवरी 1 9 33 को चांसलर के रूप में हिटलर नियुक्त किया गया था।। बाद के सभी चुनाव हिटलर के संगठन द्वारा जीते गए
          • जिसके बाद जर्मन राज्यों में सक्षम अधिनियम पारित किया गया, जिससे वीमर गणराज्य को नाजी जर्मनी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया हुई।
          In response to the injustices of World War I, Hitler wanted to evict Jews from Germany, They wanted to dominate the UK and France internationally. After the first world war in Germany, the impressive work of leaving the ban was seen. People also helped Hitler decisions at that time.

          प्रथम विश्व युद्ध के अन्याय के जवाब में, हिटलर जर्मनी से यहूदियों को बेदखल करना चाहता था, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन और फ्रांस पर हावी होना चाहते थे। जर्मनी में पहले विश्व युद्ध के बाद, प्रतिबंध छोड़ने का प्रभावशाली काम देखा गया था। लोगों ने उस समय हिटलर के फैसलों में भी मदद की।

          Their offensive foreign policy is considered to be the main cause of World War II in Europe. On September 1, 1939, Poland invaded Poland and as a result, British and French also announced the invasion of Germany. In June 1941, Hitler ordered the invasion of the Soviet Union.

          • उनकी आक्रामक विदेश नीति को यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध का मुख्य कारण माना जाता है।
          • 1 सितंबर, 1939 को, पोलैंड ने पोलैंड पर हमला किया और नतीजतन, ब्रिटिश और फ्रेंच ने जर्मनी पर आक्रमण की भी घोषणा की।
          •  जून 1941 में, हिटलर ने सोवियत यूनियन पर आक्रमण का आदेश दिया।

          By the end of 1941, the German army and European power had mostly acquired Europe and North Africa.
          They failed to defeat the Soviet Union and after joining the United States in the war, Germany had to adopt a defensive policy and faced heavy defeats.
          In the last days of the war, during the war of Berlin in 1945, Hitler married his girlfriend Eva Brown.

          • 1941 के अंत तक, जर्मन सेना और यूरोपीय शक्ति ने ज्यादातर यूरोप और उत्तरी अफ्रीका का हासिल किया था।
          • वे सोवियत यूनियन को हराने में नाकाम रहे और युद्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका में शामिल होने के बाद, जर्मनी को रक्षात्मक नीति अपनाई और भारी हार का सामना करना पड़ा।
          • युद्ध के आखिरी दिनों में, 1 9 45 में बर्लिन के युद्ध के दौरान, हिटलर ने अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन से शादी की।
          On April 30, 1945, both of them committed suicide themselves instead of being in the hands of the Red Army, and their military squad was burnt.

          30 अप्रैल, 1945 को, दोनों ने रेड आर्मी के हाथों  में आने की बजाय खुद ही आत्महत्या कर ली और उनके फौजी दस्ते को भी जला दिया गया था।

          • Under the leadership of Hitler and Hitler's inspirational plans, the Nazi empire killed approximately 5.5 million Jews and millions of people had seen this massacre with their own eyes.
          • Hitler and the Nazi Empire are responsible for the 19.3 million killed in the war and the prisoners made in the war. 
          • This was the second world in Europe, about 29 million soldiers and civilians were killed in the war

          • हिटलर और हिटलर की प्रेरणादायक योजनाओं के नेतृत्व में, नाज़ी साम्राज्य ने लगभग 5.5 मिलियन यहूदियों की हत्या कर दी और लाखों लोगों ने अपनी आंखों के साथ इस नरसंहार को देखा था।
          • हिटलर और नाज़ी साम्राज्य ही तक़रीबन युद्ध में मारे जाने वाले 19.3 मिलियन और युद्ध में कैदी बनाये गए लोगो के जिम्मेदार है। 
          • यही यूरोप का द्वितीय विश्व था ,युद्ध में लगभग 29 मिलियन सैनिक और नागरिक मारे गए थे
          We can not even imagine the total number of soldiers and civilians killed in World War II. Such massacre we will not see anything in history.
          • द्वितीय विश्व युद्ध में कुल मारे गए सैनिक और नागरिको की संख्या का हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते। ऐसा नरसंहार हमे इतिहास में कही देखने नही मिलेंगा।

          Adolf Hitler history

          • At the age of sixteen, Hitler left his schooling. From 1908 to 1913, they used to make pictures on this postcard. Hitler joined the army after World War II broke out. He was awarded two times 'Iron Cross'.
          • सोलह वर्ष की अवस्था में हिटलर स्कूली शिक्षा छोड़ दी। सन 1908 से 1913 तक ये पोस्टकार्ड पर चित्र बनाकर अपना निर्वाह करते रहे। प्रथम विश्वयुद्ध छिड़ने पर हिटलर सेना में भर्ती हो गये। उन्हें दो बार ‘आयरन क्रास’ से सम्मानित किया गया।
          • In 1919 he received membership of German Workers party Then he gave this party a new name in the form of National Social Workers Party (Nazi). Due to foresight, hard work, and perseverance, Hitler made Nazi Party the largest political party in Germany in 1932, and in 1933 it became a supremo and dictator of this Nazi Party.
          • सन 1919 में उन्होंने जर्मन वर्कर्स पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। फिर इस पार्टी को उन्होंने नेशनल सोशलिस्ट वर्कर्स पार्टी (नाजी) के रूप में नया नाम दिया। दूरदर्शिता, कड़ी मेहनत,और लगन के कारण हिटलर ने सन 1932 में नाजी पार्टी को जर्मनी के सबसे बड़ा राजनितिक दल बना दिया और सन 1933 में ये इस नाजी पार्टी के तानाशाह बन बैठे।
          • In 1936, when Germany went to the Olympics, India fought with Germany, in which due to Major Dhyanchand, a hockey magician, India defeated Germany 8-1. Hitler was also watching this match and impressed with Major DhyanChand game and offered him to play for Germany at the top of his army. But the patriot, Major Dhyanchand, laughs at the offer.
          • 1936 में जब जर्मनी में ओलिंपिक हुए थे तब भारत का मुकाबला जर्मनी से हुआ जिसमे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की वजह से भारत ने जर्मनी को 8-1 से हरा दिया था। इस मैच को हिटलर भी देख रहा था और उसने मेजर ध्यानचंद के खेल से प्रभावित होकर उन्हें अपनी सेना में उच्च पद देने जर्मनी की तरफ से खेलने की पेशकश दी। मगर देशभक्त मेजर ध्यानचंद ने यह पेशकश हसते हुए ठुकरा दी। 
          • In 1938, "Times Magazine" gave Hitler the title of "Man of the Year"
          • सन 1938 में "Times Magazine " ने हिटलर को "Man of the year" का टाइटल दिया 
          • At the battlefield Hitler retrieved the Rhineland in 1936. He also won some part of Czechoslovakia in Austria in 1938 and in 1939.
          • युध्द के मैदान में हिटलर ने सन 1936 में राइनलैड को प्राप्त किया। सन 1938 में आस्ट्रिया तथा सन 1939 में चेकोस्लोवाकिया के कुछ भाग को भी इन्होंने जीता।
          • In September 1938 Hitler started the Second World War by attacking Poland. Initially, they got success, but when they attacked Russia in 1941, he had to face defeat.
          • सितंबर 1938 में पौलैंड पर हमला कर हिटलर ने द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुवात की। प्रारंभ में तो इन्हें सफलता मिलती रही, लेकिन सन 1941 में जब उन्होंने रूस पर हमला किया तो हार का सामना करना पड़ा ।
          • In 1944 Hitler was attacked, he survived but fell ill and became mad. Hitler committed suicide on April 30, 1945.
          • सन 1944 में हिटलर पर  हमला हुआ, वो बच तो गये पर बहुत बीमार पड गये और विक्षिप्त से हो गये। 30 अप्रैल, 1945 को हिटलर ने आत्महत्या कर ली। 
          • In 10 years from 1931 to 1941, he rarely made a political mistake and took over the big area from the European conquered by Napoleon in his official.
          • सन 1931 से 1941 तक के 10 वर्षों में उन्होंने शायद ही कोई राजनितिक भूल की और नेपोलियन द्वारा जीते गये युरोप से बड़ा क्षेत्र अपने अधिकारी में कर लिया।
          • Dictator Adolf Hitler may be considered the most controversial figure of the 20th century.
          • तानाशाह एडोल्फ हिटलर को 20 वीं सदी का सर्वाधिक विवादास्पद व्यक्तित्व माना जा सकता है।

          Note: आपके पास About Hitler in Hindi मैं और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे।

          You have more information about Hitler in Hindi, Or if you find something wrong, send me a comment and an email immediately We will keep it updated. 

          Sunday, 24 June 2018

          B. R. Ambedkar biography in Hindi and English || Indian jurist || allnationalknowledge.in

          June 24, 2018

          Br Ambedkar biography || 

          डॉ. भीमराव अम्बेडकर जीवनी



          Dr BR Ambedkar was the architect of the Indian Constitution and the first Justice Minister of independent India Bhimrao Ramji Ambedkar, who is world famous. And was a major worker and social reformer who gave his life for the upliftment of the Dalits (improvement) and the improvement of India's socially backward class. A messiah for the depressed people, he constantly fought for the elimination of race discrimination.

          डॉ बी.आर.अम्बेडकर भारतीय संविधान के शिल्पकार और आज़ाद भारत के पहले न्याय मंत्री थे 
          भीमराव रामजी अम्बेडकर, जो विश्व प्रसिद्ध हैं। और एक  प्रमुख कार्यकर्ता और सामाजिक सुधारक थे जिन्होंने दलितों के उत्थान (उन्नति, सुधार)  और भारत के सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के सुधार के लिए अपना जीवन दिया। निराश लोगों के लिए एक मसीहा, वह लगातार जाति भेदभाव के उन्मूलन (समाप्ति) के लिए लड़े।

          One of the most influential people working in opposition to social discrimination Dr. BR Ambedkar was.
          सामाजिक भेदभाव के विरोध में कार्य करने वाले सबसे प्रभावशाली लोगो में से एक 
          डॉ बी.आर.अम्बेडकर (Dr. Br Ambedkar) थे। 

          महिला, मजदूर और दलितों पर हो रहे सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाई और उनके लिए लड़े भी उन्हें न्याय दिलाने के लिए भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को सदा आदर से स्मरण किया जाते है।


          Babasaheb Ambedkar - known as Indian jurist, economist, politician and social reformer.
          बाबासाहेब आंबेडकर – भारतीय न्यायज्ञ , अर्थशास्त्री , राजनेता और समाज सुधारक के नाम से जाने जाते है।



          पूरा नाम  – भीमराव रामजी अम्बेडकर
          जन्म       – 14 अप्रेल 1891
          जन्मस्थान – महू. (जि. इदूर मध्यप्रदेश)
          पिता       – रामजी
          माता       – भीमाबाई
          शिक्षा      – 1915  में एम. ए. (अर्थशास्त्र)। 1916 में कोलंबिया विश्वविद्यालय में से PHD। 1921 में मास्टर ऑफ सायन्स। 1923  में डॉक्टर ऑफ सायन्स।
          विवाह     – दो बार, पहला रमाबाई के साथ (1908 में) दूसरा डॉ. सविता कबीर के साथ (1948 में)


          Full name - Bhimrao Ramji Ambedkar
          Birth - 14 April 1891
          Birthplace - Mhow (Dist. Idur Madhya Pradesh)
          Father - Ramji
          Mother - Bhimabai
          Education - In 1915, MA (Economics). PHD from Columbia University in 1916 Master of Science in 1921 In 1923, Doctor of Science.
          Marriage - Twice, with the first Ramabai (in 1908) with the second Dr. Savita Kabir (in 1948)



          भीमराव रामजी अम्बेडकर का जन्म मध्य प्रदेश शहर छावनी माउ में हुआ था।
          वह रामजी मालोजी साकपाल थे, जो सेना के कार्यालय से थे और भीमाबाई के 14 वें और अंतिम बच्चे थे।

          उनका परिवार मराठी था और वह अंबावाद नगर से थे, जो आधुनिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में है। वे हिंदु महार (दलित) जाती से संपर्क रखते थे, जो अछूत कहे जाते थे और उनके साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था।

          Belonging to Mahar caste, who were considered untouchables, his family suffered from socio-economic discrimination. However, due to special privileges rendered to army children, he secured good education.
          महार जाति के साथ, जिन्हें अस्पृश्य माना जाता था, उनके परिवार को सामाजिक-आर्थिक भेदभाव से पीड़ित था। हालांकि, सेना के बच्चों को दिए गए विशेष विशेषाधिकारों के कारण, उन्होंने अच्छी शिक्षा हासिल की।

          स्कूली पढाई में अच्छे होने के बावजूद आम्बेडकर और अन्य अस्पृश्य (untouchable) बच्चो को विद्यालय में अलग बिठाया जाता था और अध्यापको द्वारा न तो ध्यान दिया जाता था, न ही उनकी कोई सहायता की। उनको कक्षा के अन्दर बैठने तक की अनुमति नहीं होती थी , साथ ही प्यास लगने पर कोई ऊंची जाती का व्यक्ति उचाई से पानी उनके हातो पर डालता था, क्यू की उनकी पानी और पानी के गिलास या कोई घड़ा को भी छूने की अनुमति नहीं थी।
          लोगो के मुताबिक ऐसा करने से घड़ा में रखा पानी और गिलास दोनों अपवित्र (impure, Profane) हो जाते थे। आमतौर पर यह काम स्कूल के चपरासी द्वारा किया जाता था जिसकी अनुपस्थिति में बालक आंबेडकर को बिना पानी के ही रहना पड़ता था। बाद में उन्होंने अपनी इस परिस्थिती को “ना चपरासी, ना पानी” से लिखते हुए प्रकाशित किया।

          Young Ambedkar surfaced a lot of problems while academically training himself but he surpassed all of them. In 1897, he along with his family moved to Bombay where he enrolled at the Elphinstone High School, thus becoming the first ever untouchable to attain higher education.
          युवा अम्बेडकर ने अकादमिक रूप से खुद को प्रशिक्षण देने के दौरान कई समस्याएं सामने आईं लेकिन उन्होंने उन सभी को पार कर लिया। 1897 में, वह अपने परिवार के साथ बॉम्बे चले गए जहां उन्होंने एलफिंस्टन हाई स्कूल में दाखिला लिया, इस प्रकार उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पहले अस्पृश्य बन गए।

          Completing his matriculation degree in 1907, he admitted himself to Elphinstone College in 1908, again creating history by becoming the first untouchable to enter university. He graduated from the same in 1912 with a degree in economics and political science.
          1907 में अपनी मैट्रिक डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने खुद को 1908 में एल्फिंस्टन कॉलेज में भर्ती कराया, फिर से विश्वविद्यालय में प्रवेश करने वाले पहले अस्पृश्य बनकर इतिहास बना दिया। उन्होंने 1912 में अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

          He secured a job at the Baroda state government but did not continue the same for long as he was awarded a Baroda State Scholarship, which provided him the opportunity to gain postgraduate education at Columbia University in New York City. To pursue the same, he moved to America in 1913.
          उन्होंने बड़ौदा राज्य सरकार में नौकरी हासिल की लेकिन लंबे समय तक इसे जारी नहीं रखा क्योंकि उन्हें बड़ौदा राज्य छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया, जिसने उन्हें न्यूयॉर्क शहर में कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल करने का अवसर प्रदान किया। इसका पीछा करने के लिए, वह 1913 में अमेरिका चले गए।

          He completed his MA in June 1915, majoring in Economics, with Sociology, History, Philosophy and Anthropology as other subjects of study. Two years henceforth, he gained a PhD in Economics.
          उन्होंने जून 1915 में अर्थशास्त्र में प्रमुखता हासिल की, समाजशास्त्र, इतिहास, दर्शनशास्त्र और मानव विज्ञान के साथ अध्ययन के अन्य विषयों के रूप में। दो साल से, उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी प्राप्त की।

          Meanwhile, in 1916, he enrolled for a bar course at Gray’s Inn. However, due to the termination of the scholarship, he had to return to India.
          इस बीच, 1916 में, उन्होंने ग्रेज़ इन में बार कोर्स के लिए दाखिला लिया। हालांकि, छात्रवृत्ति की समाप्ति के कारण, उन्हें भारत लौटना पड़ा।
          भीमराव आंबेडकर को आम तौर पर बाबासाहेब के नाम से जाने जाता हे, जिन्होंने आधुनिक बुद्धिस्ट आन्दोलनों को प्रेरित किया और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध दलितों के साथ अभियान चलाया, स्त्रियों और मजदूरो के हक्को के लिए लड़े। वे स्वतंत्र भारत के पहले विधि शासकीय अधिकारी (Law government official ) थे और साथ ही भारत के संविधान (Constitution of india) निर्माता (Creator) भी थे।
          आंबेडकर एक बहोत होशियार और कुशल (Skilled) विद्यार्थी थे, उन्होंने कोलम्बिया विश्वविद्यालय और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकनोमिक से बहोत सारी क़ानूनी डिग्री प्राप्त कर रखी थी और अलग-अलग क्षेत्रो में डॉक्टरेट कर रखा था, उनकी कानून, अर्थशास्त्र और राजनितिक शास्त्र पर अनुसन्धान के कारण उन्हें विद्वान की पदवी दी गयी.
          Because of his research on law, economics and political science, he was given the title of scholar.
          उनके प्रारंभिक करियर में वे एक अर्थशास्त्री, प्रोफेसर और वकील थे। बाद में उनका जीवन पूरी तरह से राजनितिक कामो से भर गया, वे भारतीय स्वतंत्रता के कई अभियानों में शामिल हुए, साथ ही उस समय उन्होंने अपने राजनितिक हक्को और दलितों की सामाजिक आज़ादी, और भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए अपने कई लेख प्रकाशित भी किये, जो बहोत प्रभावशाली साबित हुए। 1956 में उन्होंने धर्म परिवर्तन कर के बुद्ध स्वीकारा, और ज्यादा से ज्यादा लोगो को इसकी दीक्षा (Initiation) भी देने लगे।
          1990 में, मरणोपरांत आंबेडकर को सम्मान देते हुए, भारत का सबसे बड़ा नागरिकी पुरस्कार, “भारत रत्न” जारी किया। आंबेडकर की महानता के बहुत सारे किस्से और उनके भारतीय समाज के चित्रण (Depiction) को हम इतिहास में जाकर देख सकते है।

          बाबासाहेब आंबेडकर के बारे में ऐसे तथ्य Unknown interesting facts about B. R. Ambedkar 

          • Ambedkar played a key role in the establishment of the Reserve Bank of India in the year 1935.
          • अम्बेडकर ने वर्ष 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
          • He has suggested the division of both Madhya Pradesh and Bihar for better governance way back in 1955.
          • उन्होंने 1955 में बेहतर शासन के लिए मध्य प्रदेश और बिहार दोनों के विभाजन का सुझाव दिया है।
          • He wanted to sponsor Sanskrit as the official language of the Indian Union.
          • वह संस्कृत को भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में प्रायोजित करना चाहता थे ।
          • Babasaheb Ambedkar was the 14th child of his parents.
          • बाबासाहेब आंबेडकर अपने माता-पिता की 14 वी संतान थे।
          • Ambedkar contested Lok Sabha election twice but both the times he lost the election.
          • अम्बेडकर ने दो बार लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन दोनों बार चुनाव हार गए।
          • His autobiography ‘Waiting for a Visa’ is used as a text book in the Columbia University.
          • उनकी आत्मकथा 'वेटिंग फॉर ए वीजा' कोलंबिया विश्वविद्यालय में पाठ्य पुस्तक के रूप में प्रयोग की जाती है
          • He was the first Indian to complete a doctorate degree overseas.
          • वह विदेश में डॉक्टरेट की डिग्री पूरी करने वाले पहले भारतीय थे।
          • In 1990, 'Baba Saheb' was honored with the highest honor of the country 'Bharat Ratna'.
          • 1990  में ‘बाबा साहेब’ को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
          • Ambedkar was the one who insisted on having the working hours reduced from fourteen to eight hours in a day.
          • अम्बेडकर वह थे।  जिसने कामकाजी घंटों को एक दिन में चौदह से आठ घंटे तक कम करने पर जोर दिया।
          • He strongly opposed Article 370 of the Indian constitution which gives special status to the state of Jammu & Kashmir.
          • उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 का जोरदार विरोध किया जो जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देता है।
          • He played a key role in forming the National Employment Exchange Agency in India.
          • उन्होंने भारत में राष्ट्रीय रोजगार विनिमय एजेंसी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
          • Dr. Ambedkar's real name was Ambawadekar. But his teacher Mahadev Ambedkar had a lot of love for him, that is why he changed the name of Babasaheb from 'Ambawadekar' to 'Ambedkar'.
          • डॉ. आंबेडकर का वास्तविक नाम अम्बावाडेकर था। लेकिन उनके शिक्षक महादेव आंबेडकर को उनसे काफी लगाव था, इसीलिए उन्हें बाबासाहेब का उपनाम ‘अम्बावाडेकर’ से बदलकर ‘आंबेडकर’ रखा।
          • He has also been working as Principal for 2 years in Government Law College, Mumbai.
          • मुंबई के सरकारी लॉ कॉलेज में वे 2 साल तक प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत भी रह चुके है।
          • On October 14, 1956, on the day of Vijaya Dashami, Dr. Ambedkar took initiation of Buddhism with his more than 5 lakh companions in Nagpur, Maharashtra.
          • 14 अक्टूबर 1956 को विजयादशमी के दिन डॉ. आंबेडकर ने नागपुर, महाराष्ट्र में अपने 5 लाख से भी ज्यादा साथियों के साथ बौद्धधर्म की दीक्षा ली।
          • Dr. Ambedkar adopted Buddhism from a Buddhist monk, adopting three gemstones in traditional way and adopting Panchsheel. It was written in Gold Characters in the history of Buddhist-world.
          • डॉ. आंबेडकर ने एक बौद्ध भिक्षु (Monk) से पारंपरिक तरीके से तीन रत्न ग्रहण और पंचशील को अपनाते हुये बौद्ध धर्म ग्रहण किया। बौद्ध-संसार के इतिहास में इसे स्वर्णाक्षरों (Gold Characters) में लिखा गया।
          • Dr. Ambedkar had to struggle for diabetes for a long time.
          • डॉ. आंबेडकर को डायबिटीज की बीमारी से लम्बे समय तक जूझना पड़ा था।
          • The credit of giving Ashok Chakra to India's national flag also goes to Dr. Ambedkar.
          • भारत के राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र को जगह देने का श्रेय भी डॉ. अम्बेडकर को जाता है।

          • डॉ. आंबेडकर  किताबें //Books

          • हु वेअर शुद्राज,
          • दि अनरचेबल्स,
          • बुध्द अॅड हिज धम्म,
          • दि प्रब्लेंम ऑफ रूपी,
          • थॉटस ऑन पाकिस्तान आदी.
          जिस समय सामाजिक स्तर पर बहुजनो को अछूत मानकर उनका अपमान किया जाता था, उस समय आंबेडकर ने उन्हें वो हर हक्क दिलाया जो एक समुदाय को मिलना चाहिये। हमें भी अपने आसपास के लोगो में भेदभाव ना करते हुए सभी को एक समान मानना चाहिये। हर एक इंसान का जीवन स्वतंत्र है, हमें समाज का विकास करने से पहले खुद का विकास करना चाहिये। क्योकि अगर देश का हर एक व्यक्ति एक स्वयं का विकास करने लगे तो, हमारा समाज अपने आप ही प्रगतिशील हो जायेंगा।
          हमें जीवन में किसी एक धर्म को अपनाने की बजाये, किसी ऐसे धर्म को अपनाना चाहिये जो स्वतंत्रता, समानता और भाई-चारा सिखाये।


          Thursday, 21 June 2018

          अभिनेता राजकुमार राव | Rajkummar Rao Biography || Allnationalkonwledge.in

          June 21, 2018

          अभिनेता राजकुमार राव | Rajkummar Rao Biography

          www.allnationalknowledge.in

          Rajkummar Rao – राजकुमार राव अब एक जाने माने अभिनेता में से एक है। वो अब एक ऐसे कलाकार है जिन्होंने अब पूरा देश और विदेश जानता है। जिन्हें बचपन से ही फिल्मो से बहुत लगाव था। शायद इसीलिए ही वह बहुत सफल अभिनेता है। राजकुमार राव सब फिल्मो  में पूरी लगन से काम करते  है और उन्हें जो भी किरदार उन्हें दिए गए है उन्होंने उसे उन्होंने बखूबी और बढ़िया तरीके से निभाया है । उनके अभिनय से सभी काफी प्रभावित भी हुए है और उन्हें शाहिद फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला हुआ है..... 2017 में आयी उनकी न्यूटन (फिल्म) ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई थी

          अभिनेता राजकुमार राव – Rajkummar Rao Biography

          राजकुमार राव का जन्म 31अगस्त 1984 को हरियाणा के गुड़गांव में निचले-मध्यम वर्ग (lower-middle-class) के परिवार में हुआ था।हालांकि, जब उनका जन्म हुआ तो गुड़गांव आधुनिक शहर नहीं था तब यह एक छोटा ग्रामीण गांव है। बचपन में ही राजकुमार ने एक अभिनेता बनने की सोच ली थी , राजकुमार राव ने दिल्ली विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त की और बाद में फिल्म और टेलीविजन संस्थान के भारत में अभिनय का अध्ययन किया

          राजकुमार राव का करियर –  Rajkummar Rao Career

          राजकुमार राव  को पता था कि बॉलीवुड में एक अभिनेता के रूप में करियर बनाना आसान नहीं है लेकिन वह संघर्ष के लिए तैयार थे। एफटीआईआई, पुणे से स्नातक होने और पुणे से मुंबई शिफ्ट होगये , एक अभिनेता के रूप में ब्रेक पाने का उनका प्रयास 2009 में शुरू हुआ जब उन्होंने कास्टिंग निदेशकों से मुलाकात शुरू की और स्टूडियो के दौर को शुरू किया।

          'बॉम्बे मिरर' एक शार्ट फिल्म में अभिनय करके राजकुमार राव को अपना पहला ब्रेक मिला। पर इस शार्ट फिल्म से उनको ज्यादा सफलता नहीं मिली। उन्हें अपने पहले बड़े ब्रेक के लिए बहुत लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा जब उन्होंने निर्माता एकता कपूर के बालाजी टेलीफिल्म्स के एक विज्ञापन का जवाब दिया जो निर्देशक (दिबाकर बनर्जी)  फिल्म  'लव सेक्स और धोखा ' के लिए एक नए चेहरे की तलाश में थे। राजकुमार राव ने इस फिल्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । 'लव सेक्स और धोखा ' की सफलता के बाद लोगों ने राजकुमार राव  को अभिनेता के रूप में नोटिस किया। और धीरे-धीरे और तेजी से एक अद्भुत अभिनेता के रूप में जाना जाने लगा। राजकुमार राव को नेचुरल एक्टिंग के लिए ज्यादा जाना जाता है फिर उनकी दूसरी फिल्म आयी 'रागिनी एमएमएस' जो बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और उन्हें उनकी एक्टिंग के लिए प्रशंसा (appreciation)  मिली।

          वर्ष 2012 में राजकुमार ने अनुराग कश्यप की 'गैंग्स ऑफ वासेपुर -2' जैसी बड़ी फिल्मों को अपनी स्थिति मजबूत कर दिखाया । जहां उन्होंने शमशाद आलम की भूमिका निभाई। और इस करैक्टर को समझने के लिए वासेपुर गए , लोगों के व्यवहार और वह के बोलने का ढंग को समझा। 
          उसके बाद उन्होंने फिल्म के लिए कि निर्देशक अनुराग कश्यप के साथ काम करना एक सीखने का अनुभव था, हालांकि मनोज बाजपेई और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तुलना में उनकी भूमिका छोटी थी।

          उसी वर्ष उन्हें प्रशंसित मनोज बाजपेई अभिनीत 'चटगांव' में भी दिखाई दिया जहां उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी लोकेनाथ बाल का किरदार निभाया।

          वर्ष 2013 को राजकुमार राव  के करियर में मोड़ के रूप में माना जा सकता है क्योंकि अभिषेक कपूर की ' (काई पो चे) !', 'बॉयज़ तोह बॉयज़ हैं' और  फिर  हंसल मेहता द्वारा निर्देशित पुरस्कार विजेता 'शाहिद' रिलीज हुआ। 'काई पो चे!' के बावजूद उन्हें तीन मुख्य लीडों में से एक खेलने के बावजूद, उनका प्रदर्शन अनजान नहीं हुआ क्योंकि फिल्म 2013 की सबसे बड़ी हिट्स में से एक बन गई। 'काई पो चे!' निर्देशक अभिषेक कपूर के चेतन भगत के अनुकूलन उपन्यास (Novel) ' द 3 मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ' ने दर्शकों को राजकुमार के रोल ने सब को आकर्षित किया ।

          निदेशक हंसल मेहता की  'शाहिद',  एक मारे गए वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता(human rights Worker)  शाहिद आज़मी के जीवन और समय के आधार पर एक जीवनी है , राजकुमार ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए अपना पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 2013 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर आलोचकों (Critics)  का पुरस्कार प्राप्त किया। इन दो पुरस्कारों, राजकुमार ने बड़ी स्क्रीन पर उनके उपस्थिति की घोषणा की।

          वर्ष 2014 में राजकुमार सुपर हिट कंगाना रनाउत अभिनीत 'रानी' में दिखाई दिए, जहां उन्होंने विजय के किरदार निभाए। 

          उनकी अगली रिलीज, 'सिटीलाइट्स' ने उन्हें अपनी असली प्रेमिका (Girlfriend) पतरलेखा के साथ स्क्रीन पर आये  जो हंसल मेहता द्वारा निर्देशित किया गया था और आलोचनात्मक प्रशंसा (Critical appreciation)  प्राप्त की थी।

          2015 में उन्हें 'डॉली की डोली' सह-अभिनीत सोनम कपूर, पुल्किट सम्राट और वरुण शर्मा और मोहम्मद सूरी द्वारा निर्देशित 'हमारी अधुरी कहनी' जैसी बड़ी बजट वाली फिल्मों में दिखाई दिया।
          दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से प्रदर्शन किया। 

          हंसल मेहता के 'अलीगढ़'  2016  में अगले साल रिलीज हुई  
          अलीगढ़ एक अलीगढ़ के प्रोफेसर रामचंद्र सिरस की सच्ची जिंदगी की कहानी पर आधारित था, जिसे समलैंगिक (Gay)  होने के लिए समाज द्वारा अपमानित और बहिष्कार (Excommunication, boycott )किया गया था, मनोज वाजपेई ने समलैंगिक का किरदार निभाया । राजकुमार को सहायक भूमिका में देखा गया जहां उन्होंने फिल्म में एक पत्रकार दीपू सेबेस्टियन का रोल 
          किया , जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में अपनी स्थिति वापस लेने में प्रोफेसर सिरस का समर्थन करने की कोशिश करता है।
           'अलीगढ़' फिल्म ने उस साल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड मनोज बाजपेई अर्जित नहीं किया बल्कि सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता श्रेणी के लिए फिल्मकार पुरस्कार में राजकुमार को नामांकन भी प्राप्त किया। 'अलीगढ़' में राजकुमार को संदीप मारवा द्वारा एशियाई एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविज़न के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म और टेलीविज़न क्लब की जीवन सदस्यता के साथ सम्मानित किया गया।

          वर्ष 2017 अब तक राजकुमार राव के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ है, जो जिनको बहुत सारी   फिल्मों के एक में देखा गया है।  विक्रमादित्य मोत्वेन की फिल्म  (Trapped) के साथ शुरू हुआ जहां एक आदमी जो अपने किराए के फ्लैट में बंद हो जाता है और कोई भी उसके बचाव में नहीं आता है। वो उसे परिस्थिति में कैसे जीता है जब उसके पास खाने पिने के लिए  नहीं होता इस फिल्म ने फिर से अच्छे रेविएवस  हासिल किये और उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की गई।

          राजकुमार और श्रुति हसन के साथ  ' बहन  होगी तेरी' जैसी फिल्मों में देखा गया । ' बहन होगी तेरी' ने उन्हें शिव कुमार नौटियाल (गट्टू) का  रोल किया  था, जो एक युवा व्यक्ति है जो बचपन से अपने सुंदर पड़ोसी (श्रुति हसन) से प्यार करता है लेकिन दोनों परिवार उन्हें भाई और बहन के रूप में लेते हैं। हालांकि फिल्म ने  ज्यादा कमाई  नहीं कि, राजकुमार के लड़के के रूप में उनकी नेचुरल एक्टिंग सराहना की गई।

          18 अगस्त 2017 को जारी उनकी 'बरेली की बर्फी' अश्विनी अय्यर तिवारी ने निर्देशित की थी।
           यह एक तीन लोगो के बीच प्यार की कहानी है  जिसने उसे और आयुषमान खुराना को उसी लड़की, क्रिटी सैनन से प्यार में पड़ते देखा। यह फिल्म में राजकुमार के character प्रीतम विद्रोही थे, जिन्होंने सभी प्रशंसा प्राप्त की और । बॉक्स ऑफिस पर 30 करोड़ कामये 

          "महान अभिनेता अमिताभ बच्चन ने राजकुमार राव को 'बरेली की बारफी' में उनके प्रदर्शन और उनकी एक्टिंग  की सराहना करने के लिए एक पत्र लिखा था"

          सितंबर 2017 में राजकुमार राव की ब्लैक कॉमेडी 'न्यूटन' रिलीज हुई जिसे अमित मसूर्क ने निर्देशित किया था, जहां उन्होंने छत्तीसगढ़ के नक्सल-वर्चस्व वाले क्षेत्र में चुनाव कर्तव्य पर भेजे गए सरकारी क्लर्क का रोले किया था। 'न्यूटन', जिसे पहले 67 वें बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में खड़े होने का मौका मिला था, को सभी तिमाहियों से महत्वपूर्ण प्रशंसा मिली। न्यूटन ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म श्रेणी के तहत राष्ट्रीय पुरस्कार 2018 जीता।

          राजकुमार राव को बाद में एकता कपूर के हंसल मेहता निर्देशित वेब सीरीज  'बोस: डेड ऑर एलीव' में देखा जाएगा जहां वह नेताजी सुभाषचंद्र बोस की भूमिका निभाते हैं। उनकी 'बोस: डेड ऑर एलीव' देखो ने कई फिल्मों की कल्पना भी पकड़ी है।
           उन्हें हंसल मेहता के 'ओमर्टा' में भी देखा जाएगा जहां वह कुख्यात ब्रिटिश पैदा हुए आतंकवादी अहमद उमर सईद शेख के किरदार निभाते हैं, जिन्होंने 2002 में वाल स्ट्रीट जर्नल के संवाददाता डैनियल पर्ल का अपहरण और हत्या कर दी थी।


          राजकुमार राव की आने वाली फिल्में

          राजकुमार राव की आने वाली फिल्में या अंडर-प्रोडक्शन फिल्में '5 शादियों', बंगाली फिल्म 'अमी साइरा बानो' हैं, जिसमें उन्हें एक ट्रांसजेंडर की भूमिका में देखा जाएगा, 'इत्तेफाक: इट हैप्पन वन नाइट' (यश चोपड़ा के 1969 की रीमेक क्लासिक) सह-अभिनीत सोनाक्षी सिन्हा और सिद्धार्थ मल्होत्रा और अभय चोपड़ा द्वारा निर्देशित। 
          उन्हें 'लव सोनिया', रमेश सिप्पी की 'शिमला मिर्ची' में भी देखा जाएगा जहां उनके सह-कलाकार राकुल प्रीत सिंह और हेमा मालिनी हैं। और राकेश ओमप्रकाश मेहरा की  
          'फनी खान' के सह-अभिनीत अनिल कपूर, दिव्य दत्ता और ऐश्वर्या राय बच्चन होंगे। 
          अतुल मांजरेकर द्वारा निर्देशित 'फैनी खान' राजकुमार राव को पहली बार ऐश्वर्या राय के साथ देखेंगे जो लोकप्रिय ऑस्कर विजेता 2000 डच फिल्म, 'एवरीबॉडीज फेमस!' का आधिकारिक रीमेक है।


          राजकुमार राव पुरस्कार


          अपने सात साल के लंबे करियर में, राजकुमार राव ने न केवल अपने प्रदर्शन के लिए आलोचनात्मक प्रशंसा अर्जित की है बल्कि 'शाहिद' में उनके प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कुछ लोकप्रिय पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं।  :

           
          वर्ष पुरस्कार फिल्म श्रेणी
          2014 फिल्मफेयर पुरस्कार (आलोचकों के पुरस्कार) शाहिद (2012)
          श्रेष्ठ अभिनेता

          2014 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सिल्वर कमल पुरस्कार) शाहिद (2012)
          श्रेष्ठ अभिनेता

          2014 ज़ी सिने पुरस्कार (लोकप्रिय पुरस्कार) काई पो चे! (2013)
          एक सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता





          Tuesday, 19 June 2018

          Brahmagupta famous indian mathematicians | allnationalknowledge.in

          June 19, 2018

          Brahmagupta famous indian mathematicians

          ब्रह्मगुप्त प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ


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          Brahmagupta is unique mathematicians , born in 598 AD in Bhinmal, a state of Rajhastan, India. He spent most of his life in Bhinmal which was under the rule of King Vyaghramukha.

          Brahmagupta

          • Brahmagupta wrote many textbooks for mathematics and astronomy while he was in Ujjain. These include ‘Durkeamynarda’ (672), ‘Khandakhadyaka’ (665), ‘Brahmasphutasiddhanta’ (628) and ‘Cadamakela’ (624). 
          • About 1500 years ago, in 628 A.D., a book called the Brahmasphutasiddhanta was published in India. 
          • It was written by a brilliant mathematician and astronomer named Brahmagupta, and in it, he developed most of the rules that we still use to work with the numeral zero.
          •  The first person in history to define the properties of the number zero. Identifying zero as a number whose properties needed to be defined was vital for the future of mathematics and science.
          • Brahmagupta was the first person to discover the formula for solving quadratic equations.
          •  wrote that pi, the ratio of a circle’s circumference to its diameter, could usually be taken to be 3, but if accuracy were needed, then the square-root of 10 (this equals 3.162…) should be used. This is about 0.66 percent higher than the true value of pi.
          •  Brahmagupta indicated that Earth is nearer the moon than the sun.
          •  incorrectly said that Earth did not spin and that Earth does not orbit the sun. This, however, may have been for reasons of self-preservation. Opposing the Brahmans’ religious myths of the time would have been dangerous.
          •  produced a formula to find the area of any four-sided shape whose corners touch the inside of a circle. This actually simplifies to Heron’s formula for triangles.
          • Brahmagupta said the length of a year is 365 days 6 hours 12 minutes 9 seconds.
          • Brahmagupta calculated that Earth is a sphere of circumference around 36,000 km (22,500 miles).

          Brahmagupta established rules for working with positive and negative numbers, such as:
          • adding two negative numbers together always results in a negative number.
          • subtracting a negative number from a positive number is the same as adding the two numbers.
          • multiplying two negative numbers together is the same as multiplying two positive numbers.
          • dividing a positive number by a negative, or a negative number by a positive results in a negative number.


          Brahmagupta invention :

          The remarkable, prolific mathematician and astronomer Brahmagupta lived in seventh century India and made many important contributions to mathematics and astronomy. He was the first to explain how to use the numeral zero and negative numbers in mathematical calculations.

          • Indian astronomy was quite advanced compared to the work being done in the rest of the world.  When he was only 30 years old, he published his most famous book, the Brahmasphutasiddhanta.
          •  In this book, he mainly focused on issues related to astronomy. He asserted that the Earth was round and not flat, as many people still believed, and even calculated that the circumference of the Earth was approximately 36,000 km. Today, we know that the Earth's circumference is actually about 40,000 km, so Brahmagupta's calculations were pretty accurate.
          • He calculated the solar year very accurately, writing that one solar year was 365 days, 5 minutes, and 19 seconds. Down to the minute, this is what scientists have now measured the solar year to actually be
          • He also made contributions to geometry, including accurately calculating the constant pi, and developing a way to calculate the area of a cyclic quadrilateral that is still known as Brahmagupta's Formula.

          Death :

          This great mathematician died between 660 and 670. He was one of the greatest mathematicians in Indian history and his contributions to mathematics and science have made major differences to various mathematical problems by establishing the basic rules which now allow us to find their solutions. 

          Saturday, 9 June 2018

          You never use free public Wi-Fi || There are so many reasons not Use Free Wi || allnationalknowledge.in

          June 09, 2018

          You never use free public Wi-Fi || There are so many reasons not Use Free Wi-Fi 


          आप मुफ्त (Public )सार्वजनिक वाई-फाई का कभी भी उपयोग नहीं करे 



          Free Wi-Fi, Public Wifi, wifi
          आज की व्यस्त दुनिया में, सुविधा का परिणाम अधिक है, आजकल  लोग अपने मोबाइल का उपयोग ज्यादा  करते हैं। और जब मोबाइल इस्तेमला करते है तो उनको इंटरनेट की जरूरत ज्यादा होती है  और बहुत बार लोग अपना मोबाइल इंटरनेट डेटा बचने के चकर  में  मुफ्त सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करने लगते है , और फिर उनका डाटा हैक होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है और नीचे  कुछ  कुछ सावधानियां भी दी गयी है  

          In today's busy world, the result of the facility is high, Nowadays people use their mobile more. And when they use mobile, Many times people start using free public Wi-Fi networks to save their mobile internet data. And then the risk of data hacking increases.
          Below are some precautions too...

          Data Hacker in the middle

          वाई-फाई सुरक्षा खतरों के सबसे आम प्रकारों में से एक है बीच में से डेटा को  हैक करना हैं। यह वह जगह है जहां हैकर्स छिपकर ऐसी  तकनीकों के माध्यम से डेटा को रोकता है। यहां हैकर  दो अलग-अलग पार्टियों  के बीच संदेशों को रोक देंगे और रिले करेंगे। यह ऐसा लगता है कि सब कुछ सामान्य है, लेकिन हकीकत में, हैकर्स  पूरे संपर्क को नियंत्रित कर रहा होता है ।

          • Wi-Fi is one of the most common types of security threats to hack data from the middle.
          • This is where hackers intercept data through techniques like eavesdropping. 
          • Here hackers will stop messages and relay between two different parties. 
          • It seems that everything is normal ,But in reality, hackers are controlling the whole contact. 
          Data Hacker in the middle

          इस प्रकार, बैंक के दौरान, जब आप अपने बैंक खाते में लॉगिन करते हैं, यदि आपकी स्क्रीन कभी-कभी रुक जाती है या जम्प  करती है, यदि आपका कंप्यूटर आमतौर पर ऐसा नहीं करता है - आगे बढ़ने से पहले इसे जांचें।
          As such, during the bank, when you login to your bank account, if your screen is sometimes stopped or jumped, if your computer does not usually do so - Check it before proceeding.


          Open Wi-Fi password :

          जब आप किसी पब्लिक वाईफ़ाई कनेक्शन से कनेक्ट होते हैं , जैसे की  पार्क या हवाईअड्डे जैसी जगहों पर "फ्री पब्लिक वाईफाई" के रूप में लिस्टेड किया गया है, हैकर्स आपके लॉगिन होने का   इंतजार करता हैं क्योंकि ये नेटवर्क कानूनी दिखते हैं। जब आप इन नकली नेटवर्क में लॉगिन करते हैं, तो हैकर्स आपके गुप्त डेटा तक पहुंच  जाता है। जैसे कि बैंक डाटा जानकारी, फोटो ,पर्सनल जानकरी।
          • When you are connected to a public WiFi connection, such as places like a park or a airport, it has been listed as "Free Public WiFi",Hackers wait for your login because these networks look legal.
          •  When you login into these fake networks, hackers reach your secret data. Such as bank data information, photos,personal information.

          unlock Password



          एक हैकर  वेबसाइट पर शब्दों या फोटो  को बदलने की क्षमता रखत्ता है। इसका मतलब है कि एक हैकर आपके  स्मार्टफोन पर बाल अश्लीलता लोड करने जैसा कुछ कर सकता है। कहने की जरूरत नहीं है, यह एक गंभीर अपराध है।
          • A hacker has the ability to change words or pictures on the website. 
          • This means that a hacker can do something like loading child pornography on your smartphone. 
          • Needless to say, this is a serious crime.
          www.allnationalknowledge.in

          How to keep yourself protected.
          अपने आप को कैसे सुरक्षित रखें।

          • What if you’re in a situation when you do have to use public Wi-Fi? 
          • क्या होगा यदि आप ऐसी स्थिति में हैं जब आपको सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करना पड़ेगा?  
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          यहां कुछ सावधानियां दी गई हैं जिन्हें आप ले सकते हैं।

          • Use a VPN (virtual private network). If not available, look for SSL connections.
          • एक वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का प्रयोग करें। यदि उपलब्ध नहीं है, तो एसएसएल कनेक्शन देखें।
          • Keep Wi-Fi off when it’s not being used.
          • जब इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है तो वाई-फाई बंद रखें।
          •  Avoid logging into banking sites or social networks when on a public network.
          •  सार्वजनिक नेटवर्क पर बैंकिंग साइटों या सोशल नेटवर्क में लॉग इन करने से बचें।
          • Don’t click on links from within an email or website you don’t trust, or from a site you don’t know.
          • ईमेल या वेबसाइट के ऊपर लिंक पर क्लिक न करें, जिस पर आप भरोसा नहीं करते हैं, या ऐसी साइट से जिसे आप नहीं जानते हैं।
          • Don’t login into a site if there are too many people around.
          • यदि साइट पर बहुत से लोग हैं तो साइट पर लॉगिन न करें।

          cyber security and the new ways that will be developed in order to keep you and your systems safe.