Monday, 2 July 2018

Bhagat Singh Biography and Facts about in Hindi and English || हिंदी में भगत सिंह के बारे में तथ्य ||www.allnationalknowledge.in

शहीद भगत सिंह की जीवनी और उनके  बारे में ग़ज़ब रोचक तथ्य 

 Facts about Bhagat Singh in Hindi 

Bhagat facts and biography

Bhagat Singh – भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों की सूचि में भगत सिंह का नाम सबसे पहले लिया जाता है। इस नाम को पूरा वर्ल्ड जानता है। इनकी जब कभी भी हम उन शहीदों के बारे में सोचते है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिये अपने प्राणों की आहुति दी तब हम बड़े गर्व से भगत सिंह का नाम ले सकते है। 

वह राजनीतिक अवज्ञा के कई हिंसा प्रदर्शन में शामिल थे और उन्हें कई बार गिर गया किया गया था। सिंह को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी की हत्या का दोषी पाया गया और 23 मार्च, 1931 को फांसी दी गई।

23 साल की आयु में उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ फाँसी दे दी गयी थी। और मरते वक्त भी उन्होंने फाँसी के फंदे को चूमकर मौत का ख़ुशी से स्वागत किया था। तभी से भगत सिंह देश के युवाओ के प्रेरणास्त्रोत बने हुए है।


Bhagat Singh - Bhagat Singh's name is first mentioned in the list of the most influential revolutionaries of the Indian independence movement. This name knows the whole world. Whenever we think of those martyrs who sacrificed their lives for the country's independence, then we can take the name of Bhagat Singh with great pride. 

He was involved in many violence demonstrations of political defiance and he had been dropped several times. Singh was found guilty of killing British police officer and hanged on March 23, 1931

At the age of 23 he was hanged with Rajguru and Sukhdev. And at the time of his death, he kissed the hangman's trumpet and welcomed death with happiness. Since then, Bhagat Singh has remained the inspiration for youth of the country.

Bhagat Singh biography 


Bhagat Singh (Sandhu Jat) was born in 1907 to Kishan Singh and Vidyavati in No. 105, GB, Banga Village, Jarnwala Tehsil, Lyallpur District, Punjab.

Bhagat Singh (संधू जाट) का जन्म 1907 में किशन सिंह और विद्यावती को चाल नंबर 105, जीबी, बंगा ग्राम, जरंवाला तहसील, ल्याल्लापुर जिला, पंजाब में हुआ... 

He was born at the time when his father and his two uncle were released from jail. His family members were learned, some of which were actively involved in the Indian independence movement, and the rest of the Maharaja used to serve the army of Ranjit Singh.

उनका जन्म उसी समय हुआ था जब उनके पिता और उनके दो चाचा को जेल से रिहा किया गया था। उनके परिवार के सदस्य सीख थे, जिनमे से कुछ भारतीय स्वतंत्रता अभियान में सक्रीय रूप से शामिल थे, और बाकी महाराजा रणजीत सिंह की सेना की सेवा किया करते थे।

The village of Bhagat Singh's ancestor was a Khatkar Kalan, which was only a few distances from Nawashahar, Punjab (now its name changed to Shahid Bhagat Singh Nagar).

भगत सिंह के पूर्वजो का ग्राम खटकर कलां था, जो नवाशहर, पंजाब (अभी इसका नाम बदलकर शहीद भगत सिंह नगर रखा गया है) से कुछ ही दुरी पर था।

His family was politically active. His grandfather Arjun Singh was a follower of Dayanand Saraswati in the campaign for the reconstruction of Hindu Arya Samaj. It had a great effect on Bhagat Singh.

उनका परिवार राजनितिक रूप से सक्रीय था। उनके दादा अर्जुन सिंह, हिंदु आर्य समाज की पुनर्निर्मिति के अभियान में दयानंद सरस्वती के अनुयायी थे। इसका भगत सिंह पर बहोत प्रभाव पड़ा।

Bhagat Singh's father and Chacha Kartar Singh and every Dayal Singh were also members of the Ghadar Party being run by them. Arjit Singh was exiled to various legal litigation due to Sue Singh's death in 1910 after being released from prison in Lahore.

भगत सिंह के पिता और चाचा करतार सिंह और हर दयाल सिंह द्वारा चलाई जा रही ग़दर पार्टी के भी सदस्य थे। अरजित सिंह पर बहोत सारे क़ानूनी मुक़दमे होने के कारण उन्हें निर्वासित किया गया जबकि स्वरण सिंह की 1910 में लाहौर में ही जेल से रिहा होने बाद मृत्यु हो गयी।

In 1919, when he was only 12, thousands of unarmed people were killed in Bhagat Singh jalliyanwala  Bagh. When he was 14, he was one of those people who used to kill the British to defend themselves or to protect the country.

1919 में, जब वे केवल 12 साल के थे, भगत सिंह जलियांवाला बाग़ में हजारो निःशस्त्र लोगो को मारा गया। जब वे 14 साल के थे वे उन लोगो में से थे जो अपनी रक्षा के लिए या देश की रक्षा के लिए ब्रिटिशो को मारते थे।

In 1923, Bhagat Singh joined the National College of Lahore, where he participated in other activities as soon as he took part in the dramatic society (Dhongi Samaj).

In 1923, Punjabi essay organized by the Punjabi Hindi Sahitya Sammelan won essay competition, in which he wrote about the problems of Punjab. He was very inspired by Italy's Giuseppe Mazzini campaign, and in view of this, Bhagat Singh founded the Indian National Youth Association in March 1926 in the Naujawan Bharat Sabha.

Later Bhagat Singh joined the Hindustan Republic Association, which had many brave leaders like Chandrashekhar Azad, Ram Prasad Bismil and Shahid Ashfullah Khan.

1923 में, भगत सिंह लाहौर के नेशनल कॉलेज में शामिल हुए, जहा उन्होंने दूसरी गतिविधियों में भी सहभाग लिया जैसे ही नाटकीय समाज (ढोंगी समाज) में सहभाग लेना।

1923 में, पंजाब Hindi साहित्य सम्मलेन द्वारा आयोजित निबंध स्पर्धा जीती, जिसमे उन्होंने पंजाब की समस्याओ के बारे में लिखा था। वे इटली के Giuseppe Mazzini अभियान से बहुत  प्रेरित हुए थे और इसी को देखते हुए भगत सिंह ने मार्च 1926 में नौजवान भारत सभा में भारतीय राष्ट्रिय युवा संस्था की स्थापना की। 

बाद में भगत सिंह हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन में शामिल हुए, जिसमे कई बहादुर नेता थे जैसे चंद्रशेखर आज़ाद, राम प्रसाद बिस्मिल और शहीद अश्फल्लाह खान।

Given the influence of Bhagat Singh on the youth, the police took Bhagat Singh into custody in May 1927, saying that he was involved in the Lahore bomb blast in October 1926. Five weeks after being arrested and released, he was released on bail.

युवाओं पर भगत सिंह के इस प्रभाव को देखते हुए पुलिस ने मई 1927 में भगत सिंह को अपनी हिरासत में लिया ये कहकर की वे अक्टूबर 1926 में हुए लाहौर बम धमाके में शामिल थे। और हिरासत में लेने के पाच हफ्तों बाद उन्हें जमानत पर रिहा किया गया।


Bhagat Singh was also writing for Urdu and Punjabi newspapers selling in Amritsar and his editor was also. And these newspapers were published in the New India Bharat Sabha in which the British had drawn the skins.

भगत सिंह अमृतसर में बिकने वाले उर्दू और पंजाबी अखबारों के लिए लिखते भी थे और उसके संपादक भी थे। और इन्ही अखबारों को नौजवान भारत सभा में प्रकाशित किया जाता 

Kirti also used to write Kisan Party newspaper for Kirti, as well as Veer Arjun, published in Delhi, also wrote for the newspaper. Most of his articles used the name Balwant, Ranjit and Rebel.

वे कीर्ति किसान पार्टी के अखबार कीर्ति के लिए भी लिखते थे साथ ही दिल्ली में प्रकाशित होने वाले वीर अर्जुन अखबार के लिए भी लिखते थे। अपने लेख में ज्यादातर बलवंत, रणजीत और विद्रोही नाम का उपयोग करते थे।

Bhagat Singh wanted to take revenge of Lala Lajpat Rai's death . Bhagat Singh killed 17th December 1927  British police officer John Saunders. The police made many unsuccessful attempts to capture Bhagat Singh and he always failed to catch Bhagat Singh. After some time, Bhagat Singh along with Batukeshwar Dutt throws two bombs and a letter on the Principal Law House.

Where they both got caught according to their plans. Where he was sent to jail on charges of murder, and when Bhagat Singh announced 116 days fast for the sake of equal rights to the European prisoners, he got the help of the entire nation far away.

भगत सिंह लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेना चाहते थे  भगत सिंह ने  17th December 1927   ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सौन्देर्स की हत्या की। पुलिस ने भगत सिंह को पकड़ने के लिए कई असफल प्रयत्न किये और हमेशा वह भगत सिंह को पकड़ने में नाकाम रही। और कुछ समय बाद ही भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर प्रधान विधि सदन पर दो बम और एक पत्र फेका।

जहा वे दोनों अपनी योजना के अनुसार पकडे गये। जहा एक हत्या के आरोप में उन्हें जेल में भेजा गया, और जब भगत सिंह ने यूरोपियन कैदियों को समान हक्क दिलाने के लिए 116 दिन के उपवास की घोषणा की तब दूर दूर से उन्हें पुरे राष्ट्र की सहायता मिली।

The British officers submitted enough evidence against him and keeping his appeal in the High Court of England, Bhagat Singh was sentenced to 23 years of short life sentence.

ब्रिटिश अधिकारियों ने उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत जमा किए और इंग्लैंड के उच्च न्यायालय में अपनी अपील की, भगत सिंह को 23 साल की अल्पकालिक सजा सुनाई गई।


भगत सिंह के इस बलिदान ने भारतीय युवाओं को राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उठाकर लड़ने के लिए प्रेरित किया । और आज भी कई युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

भगत सिंह में बचपन से ही देशसेवा की प्रेरणा थी। उन्होंने हमेशा ब्रिटिश राज का विरोध किया। और जो उम्र उनकी खेल-कूदने की थी उस उम्र में एक क्रांतिकारी आन्दोलन किया था। भगत सिंह की बहादुरी के कई किस्से हमें इतिहास में मिल मिलेंगे।

This sacrifice of Bhagat Singh inspired Indian youth to fight for freedom of the nation. And even today many young people consider them to be their ideal.

From childhood, Bhagat Singh was the inspiration for nation service. He always opposed the British Raj. And the age at which they had to play was a revolutionary movement at that age. We will find many stories of Bhagat Singh's bravery in history.

भगत सिंह के इस बलिदान ने भारतीय युवाओं को राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उठाकर लड़ने के लिए प्रेरित किया । और आज भी कई युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

भगत सिंह में बचपन से ही देशसेवा की प्रेरणा थी। उन्होंने हमेशा ब्रिटिश राज का विरोध किया। और जो उम्र उनकी खेल-कूदने की थी उस उम्र में एक क्रांतिकारी आन्दोलन किया था। भगत सिंह की बहादुरी के कई किस्से हमें इतिहास में मिल मिलेंगे।



  •  बचपन में जब भगत सिंह अपने पिता के साथ खते में जाते थे तो वहे आपने पिता से पूछते थे की हम जमीन में बंदूक क्यों नहीं उग सकते।
  • Bhagat Singh had established "National youth organization" in his college days.
  • भगत सिंह ने आपने कॉलेज के दिनों में " National youth Organisation" की स्थापना की थी। 
  • Bhagat Singh gave the slogan of Inqlab Zindabad
  • इंकलाब जिंदाबाद का नारा भगत सिंह ने ही दिया था। 
  • Bhagat Singh's shoes, watch, pen and his shirt are still safe
  • भगत सिंह के जूते ,घडी , पेन और उनकी शर्ट आज भी सुरक्षित है 
  • Judge G.C. Hilton who was sentenced to hang Bhagat Singh
  • भगत सिंह को फांसी की सजा सुनने वाला न्यायाधीश (जज) जी.सी हिल्टन थे। 
  • After the birth of Bhagat Singh, her grandmother named her name 'Bhago Wala'. Which means 'good fortune' He later became known as 'Bhagat Singh'.
  • भगतसिंह के जन्म के बाद उनकी दादी ने उनका नाम 'भागो वाला' रखा था। जिसका मतलब होता है 'अच्छे भाग्य वाला'। बाद में उन्हें 'भगतसिंह' कहा जाने लगा।
  • Bhagat Singh did not agree with Mahatma Gandhi's policies of non-violence. Bhagat Singh felt that freedom can not be obtained without arms.
  • महात्मा गांधी की अहिंसा की नीतियों से भगत सिंह सहमत नहीं थे. भगत सिंह को लगता था कि बिना हथियार उठाए आजादी नहीं मिल सकती है।
  • When he passed the Intermediate examination in 1923, then his parents were planning to marry him. So they left the house and fled and said that now freedom will be my bride.
  • जब उन्होंने 1923 में इंटरमिजिएट परीक्षा उत्तीर्ण की तो उसके बाद उनके माता – पिता ने उनकी शादी की योजना बना रहे थे। तो वे घर छोड़कर भाग गये और उन्होंने कहा अब तो आजादी ही मेरी दुल्हन बनेगी।
  • Written by Bhagat Singh, Pandit Chandrashekhar Azad, his party got involved with the "Hindustan Republican Association", in which 4 revolutionaries were sentenced to death, including Ram Prasad Bismil in Kakori Kand.
  • काकोरी काण्ड में राम प्रसाद बिस्मिल सहित 4 क्रांतिकारियों को फाँसी की सजा हुई इससे क्रोधित होकर भगत सिंह, पण्डित चंद्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी “हिन्दुस्थान रिपब्लिकन एसोसिएशन” से जुड़ गये।
  • Bhagat Singh together with Rajguru, on 17 December 1927, the British officer, J. P. Sanders was killed.
  • भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1927  को अँग्रेज अधिकारी जे. पी. सांडर्स को मारा था।
  • Bhagat Singh had teamed up with Sukhdev to kill the Superintendent of Police James Scott in Lahore but had killed John Saunders (Assistant Superintendent) due to the misidentification.
  • भगत सिंह ने सुखदेव के साथ मिलकर लाहौर में पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कोट को मारने की रणनीति बनाई थी पर गलत पहचान के कारण जॉन सॉन्डर्स (सहायक अधीक्षक) को मार दिया था।
  • On April 8, 1929, Bhagat Singh, along with his colleagues, threw bombs at the Parliament House of the Central Assembly of the British Government.
  • 8 अप्रैल 1929 में भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार की सेण्ट्रल एसेम्बली के संसद भवन पर बम फेंके थे।
  • Seeing the growing riots of Hindu Muslims, Bhagat Singh declared himself an atheist.
  • हिन्दू मुस्लिमों के बढ़ते दंगो को देखकर भगत सिंह ने खुद को नास्तिक घोषित कर दिया था।
  • Bhagat Singh used to receive Bengali, besides Hindi, Urdu, Punjabi and English.
  • भगत सिंह को हिंदी, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी। 
  • Before going to the gallows, he was reading Lenin's biography.
  • फाँसी पर जाने से पहले वे लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे।
  • His last wish was that he should be shot, but the British government made his point of view.
  • उनकी आखरी इच्छा थी की उन्हें गोली मार दी जाए पर ब्रिटिश सरकार ने उनकी इस बात को नजर अंदाज कर दिया।
  • Bhagat Singh was to be hanged on March 24, 1931 but due to the fear of revolt, the British hanged him on March 23, 1931. It is a coincidence that the hanging day was also 23 and at that time Bhagat Singh was also 23 years old.
  • भगत सिंह को 24 मार्च 1931 को फाँसी दी जानी थी मगर विद्रोह के डर के कारण अंग्रेज़ो ने उनको 23 मार्च 1931 को फाँसी दे दी। संयोग की बात है फाँसी वाला दिन भी 23 था और उस समय भगत सिंह की आयु भी 23 वर्ष थी।
  • While going to the gallows, the three Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev were singing with fun.
  • फाँसी पर जाते समय वे तीनों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव मस्ती से गा रहे थे।

          “मेरा रंग दे बसंती चोला, मेरा रंग दे;
          मेरा रंग दे बसंती चोला। माय रंग दे बसंती चोला।”


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